भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो चुका है और करोड़ों यूजर्स अब हाई-स्पीड इंटरनेट का फायदा उठा रहे हैं. लेकिन जल्द ही वह दौर खत्म हो सकता है जब टेलीकॉम कंपनियां अनलिमिटेड 5G डेटा मुफ्त में देती थीं. हालिया इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और टेलीकॉम एक्सपर्ट्स की राय से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में 5G डेटा के लिए अलग चार्ज लिया जा सकता है या मौजूदा रिचार्ज प्लान्स में बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में करोड़ों मोबाइल यूजर्स के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब फ्री 5G डेटा की सुविधा बंद होने वाली है?

क्यों उठ रही है फ्री 5G डेटा बंद करने की मांग?
टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखने वाले फिनांशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियां अब भी बड़ी मात्रा में 5G डेटा मुफ्त उपलब्ध करा रही हैं, जबकि नेटवर्क पर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है. वर्तमान में ज्यादातर कंपनियां रोजाना 2GB या उससे ज्यादा डेटा वाले प्लान्स पर अनलिमिटेड 5G ऐक्सेस देती हैं. इससे यूजर्स को फायदा जरूर मिल रहा है, लेकिन कंपनियों के लिए नेटवर्क निवेश की लागत वसूलना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि 5G इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश के बाद कंपनियां अब उससे बेहतर कमाई करना चाहती हैं. ऐसे में फ्री डेटा मॉडल लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल माना जा रहा है.

5G यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी
देश में 5G नेटवर्क की पहुंच बढ़ने के साथ इसका इस्तेमाल भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. बड़ी संख्या में स्मार्टफोन यूजर्स अब 5G नेटवर्क पर शिफ्ट हो चुके हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार कई टेलीकॉम ऑपरेटर्स के आधे से ज्यादा ग्राहक अब 5G सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं.

तेज इंटरनेट स्पीड की वजह से वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, क्लाउड सर्विसेज और वायरलेस ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि प्रति यूजर मासिक डेटा खपत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है.

क्या रिचार्ज प्लान्स महंगे हो सकते हैं?
टेलीकॉम कंपनियों की कमाई बढ़ाने के लिए सबसे बड़ा पैमाना ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत राजस्व माना जाता है. कंपनियां लंबे समय से इसे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में 5G डेटा के लिए अलग श्रेणी के प्लान्स पेश किए जा सकते हैं या मौजूदा रिचार्ज पैक्स की कीमतों में बदलाव किया जा सकता है.

कुछ रिपोर्ट्स में इस कीमत वृद्धि की वजह पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को बताया जा रहा है. चूंकि मोबाइल टावर चलाने की कुल परिचालन लागत में बिजली और ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक होती है. ऐसे में डीजल की बढ़ती कीमतें टेलीकॉम कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, क्योंकि कई मोबाइल टावरों में बैकअप पावर के लिए अब भी डीजल का इस्तेमाल किया जाता है. इससे नेटवर्क संचालन का खर्च बढ़ने की आशंका है, जिसका असर भविष्य में टेलीकॉम कंपनियों की लागत और रणनीति पर पड़ सकता है.

दुनिया के कई देशों में ज्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है. जबकि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में यूजर्स अनलिमिटेड 5G डेटा का लाभ उठा रहे हैं. ऐसे में टेलीकॉम कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मॉडल की तरफ बढ़ सकती हैं.

Jio, Airtel और Vi पर क्या होगा असर?
अगर फ्री 5G डेटा बंद करने या सीमित करने का फैसला लिया जाता है तो इसका असर सबसे पहले उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो भारी मात्रा में इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं. खासतौर पर वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और वायरलेस ब्रॉडबैंड सेवाओं पर निर्भर यूजर्स को नए प्लान्स चुनने पड़ सकते हैं.

हालांकि फिलहाल किसी भी टेलीकॉम कंपनी ने आधिकारिक तौर पर फ्री 5G डेटा बंद करने की घोषणा नहीं की है. लेकिन इंडस्ट्री में चल रही चर्चाएं यह संकेत जरूर दे रही हैं कि आने वाले महीनों में रिचार्ज प्लान्स और 5G ऑफर्स में बदलाव देखने को मिल सकता है.

फिलहाल ग्राहकों को मौजूदा योजनाओं का लाभ मिल रहा है, लेकिन भविष्य में 5G सेवाओं के लिए अलग कीमत चुकानी पड़े तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. टेलीकॉम सेक्टर की अगली बड़ी रणनीति अब इसी दिशा में जाती दिखाई दे रही है.

 

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Source : Agency