Gold Price Crash: रिकॉर्ड हाई से ₹37,000 टूटा सोना, क्या खरीदारी का यही है सबसे अच्छा मौका?
मुंबई
साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। वैश्विक तनाव, अमेरिकी फेड की सख्त मौद्रिक नीति और महंगाई की चिंता के बीच गोल्ड की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। जनवरी 2026 में सोने की कीमत 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद इसमें करीब 28 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। हाल के दिनों में कीमत दो बार 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसली और फिलहाल करीब 4,040 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है। तब जनवरी में भारत में इसकी कीमत करीब 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पीक लेवल पर पहुंच गई थी। हालांकि, अब सोने का भाव 1.43 लाख रुपये पर आ गया है। सोने का भाव अपने पीक लेवल से 37,000 रुपये कम हो चुका है। पिछले कुछ महीनों से सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या सोना अभी और सस्ता हो सकता है?
क्या सोने में फिर आएगी गिरावट?
इस साल सोने पर सबसे बड़ा असर ईरान युद्ध और उससे जुड़े घटनाक्रमों का पड़ा है। तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। हालांकि बाद में युद्धविराम की उम्मीद से तेल की कीमतें नरम हुईं, लेकिन अमेरिका-ईरान वार्ता टूटने और फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
क्यों आ रही है सोने में गिरावट
सोने की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का भी बड़ा असर पड़ रहा है। सोना कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि फिलहाल गोल्ड पर दबाव बना हुआ है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने महंगाई पर काबू पाना अपनी प्राथमिकता बताया है। बाजार को उम्मीद है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती नहीं होगी। सितंबर की बैठक में दरें बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में सोने की कीमतों में तेजी की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है।
क्या कहता है सोने का रिकॉर्ड?
हालांकि लंबे पीरियड में आंकड़े बताते हैं कि सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। पिछले 30 सालों में इसकी कीमत लगभग 950 फीसदी बढ़ी है। वहीं, पिछले पांच सालों में भी गोल्ड ने करीब 19 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि (CAGR) दर से रिटर्न दिया है। इतिहास में कई बार रिकॉर्ड हाई बनाने के बाद सोने में 40 फीसदी से अधिक की गिरावट भी देखी गई है। इसलिए शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि कोई निवेशक लंबे पीरियड के लिए पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी गोल्ड रखना चाहता है, तो एक साथ निवेश के बजाय अलग-अलग समय पर धीरे-धीरे खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है।


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